संस्था के मूल उद्द्येश्य

१. क्षत्रिय समाज को एकजुट करना तथा आर्थिक व शैक्षिक रूप से कमजोर और पिछड़े लोगों की सहायता करना |
२. ग़रीब, अनाथ और विकलांग व्यक्तियों के हितों की रक्षा करना |
३. सामाजिक कुरीतियों जैसे दहेज प्रथा, बाल विवाह, नारी उत्पीड़न, बाल श्रम, भ्रूण हत्या तथा अन्य सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध संघर्ष करना और उन्हें मिटाना |
४. क्षेत्रवाद को मिटाना और देश के सभी क्षत्रिय भाईयों व अन्य भाईयों को सामाजिक दृष्टि से समान अवसर प्रदान करवाना|
५. आर्थिक रूप से कमजोर क्षात्रों को शैक्षिक सहायता प्रदान कारना |
६. समाज में कन्या भ्रूण हत्या के विरुद्ध जन जागृति पैदा करना |
७. आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की कन्या का सुयोग्य वर से विवाह संपन्न करना |
८. देश के चहुमुखी विकास के लिए समाज के मेधावी क्षात्र-क्षात्रओं को प्रोत्साहित करने का सकारात्मक प्रयास करना तथा वर्ष में एक बार अवश्य ही पुरस्कृत करना |
९. मानव समाज के लिए आवश्यक सुविधाओं जैसे बिजली, पानी, सड़क इत्यादि की प्राप्ति के लिए संघर्ष करना |
१०. वायुमंडल को प्रदूषण से बचाने के लिए वृक्षारोपण एवम आवश्यक कार्यकलाप करना |
११. मानव समाज के चौमुखी विकास के लिए जगह-जगह पुस्तकालय, पार्क, सरकारी डिसपेनस्री, महिलाओं के लिए सिलाई व कढ़ाई केंद्र की व्यवस्था करने की दिशा में सकारात्मक प्रयास एवं असंगठित क्षेत्र की महिलाओं को सुनिस्चित रोज़गार प्रदान करना |

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